न्यूजीलैंड वनडे सीरीज में सेलेक्शन को लेकर पहली बार सामने आया देवदत्त पडिक्कल का रिएक्शन, कहा ‘शांति रखो और रन बनाते रहो’

जनवरी 7, 2026

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Devdutt Padikkal (Image credit Twitter – X)

कर्नाटक के बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल इस समय विजय हजारे ट्रॉफी में शानदार फॉर्म में चल रहे हैं। उन्होंने मौजूदा टूर्नामेंट में 600 से ज्यादा रन बनाए हैं और लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया है। इसके बावजूद उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ भारतीय वनडे टीम में जगह नहीं मिल पाई है।

भारतीय व्हाइट-बॉल टीम में जगह बनाना आज के समय में किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं है, क्योंकि प्रतिस्पर्धा बेहद ज्यादा है और लगभग हर बल्लेबाज अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।

इस मुद्दे पर बात करते हुए पडिक्कल ने बेहद संतुलित और परिपक्व सोच दिखाई। उन्होंने कहा कि वह चयन को लेकर निराश नहीं हैं और इस स्थिति को समझते हैं। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में पडिक्कल ने कहा कि उन्होंने चयन पर नजर जरूर रखी थी, लेकिन साथ ही यह भी समझते हैं कि वनडे टीम में कई बल्लेबाज लाइन में हैं और सभी अच्छा कर रहे हैं। ऐसे में टीम में जगह बनाना आसान नहीं होता।

उन्होंने आगे कहा कि एक क्रिकेटर के तौर पर आपको इन बातों से समझौता करना सीखना पड़ता है। सबसे जरूरी बात यही है कि आप अपना काम करते रहें और लगातार रन बनाते रहें। यही चीज अंत में आपके पक्ष में जाती है।

पडिक्कल का क्रिकेट सफर पारंपरिक टेस्ट क्रिकेट की सोच से शुरू हुआ था। बचपन से उनका सपना टेस्ट क्रिकेट खेलने का रहा, इसी वजह से उनकी बल्लेबाजी तकनीक भी उसी हिसाब से ढली। हालांकि, आईपीएल जैसे तेज टी20 फॉर्मेट में खेलने के लिए उन्हें अपने खेल में बदलाव करना पड़ा। यह बदलाव आसान नहीं था, लेकिन सही मार्गदर्शन और मेहनत से उन्होंने खुद को ढाल लिया।

RCB की कोचिंग से टी20 क्रिकेट में सुधार

इस बदलाव का श्रेय वह रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के सपोर्ट स्टाफ को देते हैं। खासतौर पर दिनेश कार्तिक और एंडी फ्लावर ने उन्हें टी20 क्रिकेट को बेहतर ढंग से समझने में मदद की। पडिक्कल ने बताया कि पहले वह पावरप्ले के बाद के ओवरों को लेकर ज्यादा नहीं सोचते थे, लेकिन कोचिंग स्टाफ की मदद से उन्होंने सीखा कि टी20 में अपने खेल को कैसे अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

वनडे क्रिकेट को लेकर पडिक्कल का मानना है कि यह फॉर्मेट लय और पैटर्न का खेल है। उन्हें 50 ओवर के क्रिकेट में अपनी बल्लेबाज़ी की सही समझ जल्दी मिल गई, जिससे वह पारी को संभालते हुए जरूरत पड़ने पर दबाव भी बना सकते हैं।

उनका कहना है कि नई गेंद के सामने शुरुआती ओवर संभालना जरूरी होता है और उसके बाद गेंदबाजों पर दबाव बनाना आसान हो जाता है। परिस्थिति के अनुसार खुद को ढालना ही उनकी बल्लेबाजी की सबसे बड़ी ताकत है।

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