
भारतीय टीम के लिए इंग्लैंड दौरा उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। टी20 सीरीज में पहले आयरलैंड और फिर इंग्लैंड के खिलाफ एक भी मैच नहीं जीतने वाली टीम इंडिया वनडे सीरीज भी 2-1 से गंवा बैठी। तीसरे और निर्णायक मुकाबले में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 387 रन का विशाल स्कोर बनाया। जवाब में भारतीय टीम पूरी कोशिश के बावजूद 27 रन से मैच हार गई।
आईसीसी वनडे रैंकिंग में नंबर-1 होने के बावजूद भारत का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। 2027 वनडे विश्व कप अब ज्यादा दूर नहीं है, ऐसे में इस हार ने टीम प्रबंधन को कई सवालों के जवाब तलाशने पर मजबूर कर दिया है। आइए जानते हैं ऐसे 3 कारण जिसकी वजह से इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में भारत को हार का सामना करना पड़ा:
1. अनुभवहीन गेंदबाजी
इस सीरीज में भारत की गेंदबाजी यूनिट अनुभव के मामले में कमजोर नजर आई। जसप्रीत बुमराह की वापसी जरूर हुई, लेकिन वह भी लंबे समय बाद वनडे खेल रहे थे। उनके अलावा तेज गेंदबाजी विभाग में ज्यादा अनुभवी विकल्प मौजूद नहीं थे।
प्रसिद्ध कृष्णा के पास सीमित वनडे अनुभव था, जबकि अर्शदीप सिंह ने टी20 में काफी मैच खेले हैं, लेकिन वनडे में उनका अनुभव कम है। वहीं, गुरनूर बरार और प्रिंस यादव जैसे युवा गेंदबाजों पर भी बड़ी जिम्मेदारी डाल दी गई, जिन्होंने अपने करियर में बहुत कम वनडे मैच खेले थे।
टीम प्रबंधन ने मोहम्मद सिराज को आराम दिया, जबकि मोहम्मद शमी और शानदार फॉर्म में चल रहे भुवनेश्वर कुमार को टीम में शामिल नहीं किया। इसके अलावा हर्षित राणा चोट के कारण सीरीज से बाहर हो गए। इन सभी कारणों से भारत की गेंदबाजी कमजोर पड़ गई।
2. बल्लेबाज़ी क्रम में लगातार बदलाव पड़ा भारी
भारतीय टीम की सबसे बड़ी ताकत हमेशा उसका स्थिर बल्लेबाजी क्रम रहा है। लेकिन इस सीरीज में टीम प्रबंधन ने बल्लेबाजी क्रम में बदलाव किए, जिसका असर साफ दिखाई दिया।
दूसरे वनडे में ईशान किशन को टीम में शामिल किया गया और उन्हें नंबर-4 पर बल्लेबाजी का मौका मिला। इसके चलते लंबे समय से इस स्थान पर खेल रहे श्रेयस अय्यर को नंबर-5 पर उतरना पड़ा। हालांकि, अय्यर ने अच्छी बल्लेबाजी की, लेकिन ईशान किशन इस मौके का फायदा नहीं उठा सके और दो मैचों में सिर्फ 15 रन बना पाए।
इसके अलावा विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी भी ईशान किशन को दी गई, जबकि केएल राहुल पिछले कुछ वर्षों से वनडे में यह भूमिका निभाते आ रहे थे। लगातार बदलावों से बल्लेबाजी में वह स्थिरता नहीं दिखी, जिसकी टीम को जरूरत थी।
3. बुमराह की गैरमौजूदगी का नहीं मिला विकल्प
जसप्रीत बुमराह ने वापसी के बाद अपनी शानदार गेंदबाजी से इंग्लैंड के बल्लेबाज़ों पर दबाव बनाया। भले ही उन्हें ज्यादा विकेट नहीं मिले, लेकिन उन्होंने रन गति पर अच्छी तरह रोक लगाई।
हालांकि, तीसरे वनडे से पहले उनके घुटने में सूजन आ गई और वह निर्णायक मुकाबले में नहीं खेल सके। उनकी गैरमौजूदगी का असर भारतीय गेंदबाजी पर साफ दिखाई दिया। लॉर्ड्स में इंग्लैंड ने 387 रन बना डाले और भारतीय गेंदबाज पूरी तरह बेअसर नजर आए।
गुरनूर बरार ने अपने 10 ओवर में 97 रन खर्च कर दिए, जिससे इंग्लैंड को बड़ा स्कोर बनाने में मदद मिली। बुमराह अक्सर चोट से जूझते रहे हैं, इसलिए टीम इंडिया को ऐसे गेंदबाज तैयार करने होंगे जो उनके नहीं खेलने पर भी जिम्मेदारी संभाल सकें।
इंग्लैंड के खिलाफ यह हार भारत के लिए एक बड़ा सबक है। अगर टीम को 2027 वनडे विश्व कप में खिताब जीतने की चुनौती पेश करनी है, तो उसे अपनी गेंदबाजी को मजबूत करना होगा, बल्लेबाजी क्रम में स्थिरता लानी होगी और बुमराह पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहने की आदत से बाहर निकलना होगा। तभी टीम बड़े टूर्नामेंटों में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर पाएगी।









