
33 वर्षीय स्पिन ऑलराउंडर सरांश जैन का भारतीय टेस्ट टीम में चयन उनके लंबे संघर्ष और धैर्य का नतीजा है। श्रीलंका के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज के लिए जब उनका नाम टीम में शामिल किया गया, तो यह पल उनके और उनके परिवार के लिए बेहद भावुक था।
सरांश का कहना है कि उन्हें यकीन था कि एक दिन वह भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट जरूर खेलेंगे, लेकिन उन्हें उम्मीद नहीं थी कि मौका इतनी जल्दी मिल जाएगा।सरांश ने बताया कि जिस दिन टीम का ऐलान हुआ, उस समय वह सुबह मंदिर जा रहे थे। रास्ते में उनके फोन पर लगातार कॉल और मैसेज आने लगे। पहले तो उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर बात क्या है।
जब एक दोस्त ने फोन कर उन्हें बधाई दी, तब भी उन्हें विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने गाड़ी सड़क किनारे रोकी और अपने फोन में टीम की आधिकारिक घोषणा देखी। अपना नाम भारतीय टीम में देखकर वह बेहद खुश हो गए।
परिवार की आंखों में छलक पड़े खुशी के आंसू
घर पहुंचने के बाद सरांश ने यह खबर अपने परिवार के साथ साझा की। उनके पिता, मां, बड़े भाई और पत्नी सभी भावुक हो गए। सरांश ने कहा कि यह पल उनके 26 साल के कठिन परिश्रम, अनुशासन और लगातार मेहनत का सबसे बड़ा इनाम था। उन्होंने हमेशा अपने खेल पर भरोसा रखा और कभी हार नहीं मानी।
सरांश जैन का मानना है कि आज के समय में फिटनेस और फील्डिंग का स्तर काफी ऊंचा हो चुका है, इसलिए उम्र अब खिलाड़ियों के प्रदर्शन में बड़ी बाधा नहीं बनती। उन्होंने कहा कि 33 साल की उम्र उनके लिए सिर्फ एक आंकड़ा है। अगर इस साल भारतीय टीम में मौका नहीं मिलता, तो उन्हें पूरा विश्वास था कि अगले एक-दो साल में जरूर मिलता।
सरांश ने कहा कि उन्हें हमेशा भरोसा था कि वह भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलेंगे। उन्होंने कभी खुद पर विश्वास नहीं खोया और लगातार घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करते रहे।
आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और अब वह भारतीय टेस्ट टीम का हिस्सा बन चुके हैं। उनकी कहानी उन खिलाड़ियों के लिए बड़ी प्रेरणा है, जो लंबे समय तक मौके का इंतजार करते हैं और फिर भी अपने सपनों का पीछा नहीं छोड़ते।








