हाल ही में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने वाले अजिंक्य रहाणे (Ajinkya Rahane) ने भारतीय टेस्ट टीम के मौजूदा प्रदर्शन पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में भारत का टेस्ट क्रिकेट में प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है।
घर में टेस्ट सीरीज गंवाने से लेकर विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) फाइनल की रेस से लगभग बाहर होने तक, टीम को कई निराशाजनक नतीजों का सामना करना पड़ा। रहाणे का मानना है कि टीम को दोबारा मजबूत बनाने के लिए सिर्फ युवा खिलाड़ियों पर भरोसा करना काफी नहीं होगा।
रहाणे के अनुसार टेस्ट क्रिकेट सिर्फ प्रतिभा का नहीं, बल्कि धैर्य और मजबूत मानसिकता का खेल है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को मुश्किल परिस्थितियों में लंबे समय तक टिककर खेलने की आदत डालनी होगी।
टेस्ट मैच का हर सत्र अहम होता है और जो टीम दबाव वाले समय को अच्छी तरह संभालती है, वही अंत में जीत हासिल करती है। उनके मुताबिक यही चीज मौजूदा भारतीय टीम में सबसे ज्यादा सुधार की मांग करती है।
सीनियर खिलाड़ियों की भूमिका बेहद अहम
पूर्व भारतीय बल्लेबाज ने कहा कि टेस्ट टीम में कम से कम सात से आठ अनुभवी खिलाड़ियों का होना जरूरी है। उनका मानना है कि अनुभवी खिलाड़ी सिर्फ अपने प्रदर्शन से ही नहीं, बल्कि ड्रेसिंग रूम में युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन करके भी टीम को मजबूत बनाते हैं। फिलहाल भारतीय टीम में कई नए चेहरे हैं, लेकिन अनुभवी खिलाड़ियों की कमी साफ महसूस हो रही है।
रहाणे ने कहा कि भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी चुनौती यह रही कि कई सीनियर खिलाड़ी लगभग एक ही समय पर टीम से बाहर हो गए। इससे टीम का संतुलन प्रभावित हुआ और युवा खिलाड़ियों पर अचानक बड़ी जिम्मेदारी आ गई। उनका मानना है कि बदलाव धीरे-धीरे होना चाहिए, ताकि नए खिलाड़ियों को सीखने का समय मिल सके।
गिल और गंभीर के सामने बड़ी जिम्मेदारी
रहाणे ने कहा कि कप्तान शुभमन गिल और मुख्य कोच गौतम गंभीर के सामने अब एक मजबूत टेस्ट टीम तैयार करने की चुनौती है। उन्होंने सलाह दी कि टीम में अनुभव और युवा जोश का सही संतुलन बनाया जाए।
रहाणे का मानना है कि अगर भारतीय टीम सीनियर खिलाड़ियों के अनुभव का सम्मान करते हुए आगे बढ़ेगी, तो वह फिर से टेस्ट क्रिकेट में दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में शामिल हो सकती है।








