1. बल्लेबाजी क्रम तय करना होगा, खिलाड़ियों को मिले निश्चित भूमिका
पिछले कुछ मुकाबलों में भारतीय टीम ने बल्लेबाजी क्रम में लगातार बदलाव किए हैं। तिलक वर्मा, शिवम दुबे और अक्षर पटेल जैसे खिलाड़ियों को अलग-अलग स्थानों पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया। टी20 क्रिकेट में परिस्थितियों के अनुसार बदलाव जरूरी होते हैं, लेकिन बार-बार बल्लेबाजी क्रम बदलने से खिलाड़ी अपनी भूमिका को लेकर असमंजस में पड़ सकते हैं।
तीसरे टी20 में भारत को हर खिलाड़ी की भूमिका पहले से तय करनी होगी। इससे बल्लेबाज मानसिक रूप से बेहतर तैयारी कर सकेंगे और मैदान पर अधिक आत्मविश्वास के साथ खेल पाएंगे। लगातार बदलाव करने के बजाय स्थिरता पर ध्यान देना टीम के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
2. अलग गेंदबाजी संयोजन आजमाने की जरूरत
आयरलैंड दौरे पर भारत ने सिर्फ एक मुख्य स्पिनर के साथ खेला था, लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ टीम ने दो विशेषज्ञ स्पिनरों को मौका दिया। यह रणनीति सफल नहीं रही। खास तौर पर रवि बिश्नोई काफी महंगे साबित हुए और उन्होंने रन लुटाने के साथ अतिरिक्त गेंदें भी फेंकी।
ऐसे में तीसरे मुकाबले में भारत एक अतिरिक्त तेज गेंदबाज को शामिल करने पर विचार कर सकता है। इंग्लैंड की परिस्थितियों में तेज गेंदबाजों को अधिक मदद मिलती है, इसलिए यह बदलाव टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। इससे कप्तान श्रेयस अय्यर के पास गेंदबाजी के अधिक विकल्प भी होंगे।
3. मिडिल ऑर्डर में स्ट्राइक रोटेशन पर देना होगा ध्यान
भारतीय बल्लेबाजों को सिर्फ चौके-छक्कों पर निर्भर रहने के बजाय बीच के ओवरों में स्ट्राइक रोटेट करने की कला पर भी ध्यान देना होगा। दूसरे टी20 में कुछ बल्लेबाजों ने रन तो बनाए, लेकिन उनकी बल्लेबाजी की गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही।
अगर भारत को बड़ा स्कोर बनाना है या लक्ष्य का सफल पीछा करना है, तो बल्लेबाजों को लगातार सिंगल-डबल लेते हुए स्कोरबोर्ड चलाते रहना होगा। साथ ही एक रन को दो और दो रन को तीन में बदलने की कोशिश करनी होगी। इससे विपक्षी टीम पर दबाव बनेगा और बड़े शॉट खेलने का मौका भी आसानी से मिलेगा।
खैर, तीसरा टी20 मुकाबला भारत के लिए करो या मरो जैसा साबित हो सकता है। मैन इन ब्लू को जीत हासिल करने के लिए बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में बेहतर प्रदर्शन करना होगा।







