
इंग्लैंड के ऑलराउंडर जैकब बेथल के इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने को लेकर हुई एक जोरदार चर्चा ने खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट, फ्रेंचाइजी की प्रतिबद्धताओं और नेशनल प्रायॉरिटीज पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। इस बातचीत में एक तरफ इंग्लैंड के पूर्व कप्तान सर एलिस्टर कुक थे, तो दूसरी तरफ रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु मैनेजमेंट के सदस्य दिनेश कार्तिक और डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट ऑपरेशन्स मो बोबाट शामिल थे।
‘स्टिक टू क्रिकेट’ पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान, चर्चा इस बात पर केंद्रित रही कि आईपीएल 2026 के दौरान आरसीबी के लिए बेथल को शुरुआत में खेलने का मौका नहीं मिला। न्यूजीलैंड के खिलाफ इंग्लैंड की टेस्ट सीरीज से पहले, कुक समेत कई पूर्व खिलाड़ियों ने बेथल को आईपीएल जल्दी छोड़कर घर लौटने और तैयारी करने की सलाह दी थी।
उनका तर्क था कि एक अहम इंटरनेशनल खिलाड़ी के लिए “बेंच पर बैठे रहना” नुकसानदेह है। कुक ने साफ तौर पर कहा कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट के मैच इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने इस बात पर निराशा जताई कि अहम इंटरनेशनल मैचों से पहले इंग्लैंड के बेहतरीन खिलाड़ी बाहर बैठे रहते हैं।
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हालांकि, आरसीबी के कोच और भारत के पूर्व विकेटकीपर दिनेश कार्तिक ने कुक की बात का कड़ा विरोध किया और प्रोफेशनल कॉन्ट्रैक्ट की अहमियत पर जोर दिया। कार्तिक ने कहा कि खिलाड़ी अपनी मर्जी से ऑक्शन में हिस्सा लेते हैं और कॉन्ट्रैक्ट साइन करते हैं, जिसका मतलब है कि अगर उन्हें प्लेइंग XI में नहीं चुना जाता है, तो वे बस टीम छोड़कर जाने का फैसला नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि अगर बेंच पर बैठे हर खिलाड़ी ने ऐसा रवैया अपनाया, तो टीमों के पास सिर्फ 11 खिलाड़ी ही बचेंगे। कार्तिक ने इस बात पर जोर दिया कि उपलब्धता के बारे में कोई भी फैसला ऑक्शन में शामिल होने से पहले ही ले लेना चाहिए, न कि सीजन के बीच में टीम छोड़कर चले जाना चाहिए।
आरसीबी के मो बोबाट ने भी अनुभव के महत्व पर जोर दिया और कहा कि विराट कोहली जैसे वर्ल्ड-क्लास खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर करने से युवा टैलेंट को बहुत जरूरी अनुभव मिला। वहीं, कुक अपनी बात पर अड़े रहे और बताया कि बाद में टेस्ट मैचों में वापसी करने पर बेथल को रन बनाने में संघर्ष करना पड़ा था।









